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Women’s Day Speech, Essay & Poems in Hindi, English and Marathi {New 2018}

Women’s Day Speech: International Women’s day speech in Hindi 2018. Happy Women’s day speech in English and Marathi. Women’s day essay. Women’s day poems. 8th March the big day all over the world. The day is known as International women’s day. This year we have some amazing speeches for this women’s day. You can share and download the speeches in all major languages like Hindi, English, and Marathi.

Women’s Day Speech in Hindi

एक दिवस आता है और हम अपने आपको समूचा उड़ेल देते हैं, नारों, भाषणों, सेमिनारों और आलेखों में। बड़े-बड़े दावे, बड़ी-बड़ी बातें। यथार्थ इतना क्रूर कि एक कोई घटना तमाचे की तरह गाल पर पड़ती है और हम फिर बेबस, असहाय, अकिंचन।

महिला दिवस हम सभी का अस्मिता दिवस है। गरिमा दिवस या जागरण दिवस कह लीजिए। उन जुझारू और जीवट महिलाओं की स्मृति में मनाया जाने वाला जो काम के घंटे कम किए जाने के लिए संघर्ष करती हुई शहीद हो गई। इतिहास में महिलाओं द्वारा प्रखरता से दर्ज किया गया वह पहला संगठित विरोध था। फलत: 8 मार्च नियत हुआ महिलाओं की उस अदम्य इच्छाशक्ति और दृढ़ता को सम्मानित करने के लिए।

जब हम ‘फेमिनिस्ट’ होते हैं तब जोश और संकल्पों से लैस हो दुनिया को बदलने निकल पड़ते हैं। तब हमें नहीं दिखाई देती अपने ही आसपास की सिसकतीं, सुबकतीं स्वयं को सँभालतीं खामोश स्त्रियाँ। न जाने कितनी शोषित, पीड़ित और व्यथित नारियाँ हैं, जो मन की अथाह गहराइयों में दर्द के समुद्री शैवाल छुपाए हैं।

कब-कब, कहाँ-कहाँ, कैसे-कैसे छली और तली गई स्त्रियाँ। मन, कर्म और वचन से प्रताड़ित नारियाँ। मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक-असामाजिक कुरीतियों, विकृतियों की शिकार महिलाएँ। सामाजिक ढाँचे में छटपटातीं, कसमसातीं औरत, जिन्हें कोई देखना या सुनना पसंद नहीं करता। क्यों हम जागें किसी एक दिन। क्यों न जागें हर दिन, हर पल अपने आपके लिए।

8 मार्च मनाएँ, लेकिन महिला दिवस सही अर्थों में तब होता है जब सुनीता विलियम्स सितारों की दुनिया में मुस्कुराती हुई विचरण करती हैं। तब जब तमाम ‘प्रभावों’ का इस्तेमाल करने के बाद भी कोई ‘मनु शर्मा’ सलाखों के पीछे चला जाता है और एक लड़ाई जीत ली जाती है।

मगर तब महिला दिवस किस ‘श्राद्ध’ की तरह लगता है जब नन्ही-सुकोमल बच्चियाँ निम्न स्तरीर तरीके से छेड़छाड़ की शिकार होती हैं। शर्म आती है इस दिवस को मनाने से जब ‘धन्वंतरि’ जैसी सास किसी हॉरर शो की तरह अपनी बहू के टुकड़े कर डालती है और एक समय विशेष के बाद एक राजनीतिक चादर में गठरी बनाकर न जाने कौन से बगीचे के कोने में फेंक दी जाती है। जाने कहाँ चले जाते हैं वे मंचासीन सफेदपोश जो ‘भूमि’ के फोटो को माला पहनाकर खुद माला पहन कार का शीशा चढ़ाकर धुआँ छोड़ते दिखाई देते थे।

पहले उस राजनीतिक चादर की गठरी खोलनी होगी, जिसमें नारी जाति की अस्मिता टुकड़े करके रखी गई है। नन्ही बालिकाएँ अभी समझ भी नहीं पाती हैं कि उनके साथ हुआ क्या है और शहर का मीडिया खबर के बहाने रस लेने दौड़ पड़ता है।

Women’s Day Speech

कितना गिर गए हैं हम और अभी कितना गिरने वाले हैं। रसातल में भी जगह बचेगी या नहीं? एक अजीब-सा तर्क भी उछलता है कि महिलाएँ स्वयं को परोसती हैं तब पुरुष उसे छलता है। या तब पुरुष गिरता है। सवाल यह है कि पुरुष का चरित्र इस समाज में इतना दुर्बल क्यों है?

उसके अपने आदर्श, संस्कार, मूल्य, नैतिकता, गरिमा और दृढ़ता किस जेब में रखे सड़ रहे होते हैं? सारी की सारी मर्यादाएँ देश की ‘सीताओं’ के जिम्मे क्यों आती हैं जबकि ‘राम’ के नाम पर लड़ने वाले पुरुषों में मर्यादा पुरुषोत्तम की छबि क्यों नहीं दिखाई देती?

पुरुष चाहे असंख्‍य अवगुणों की खान हो स्त्री को अपेक्षित गुणों के साथ ही प्रस्तुत होना होगा। यह दोहरा दबाव क्यों और कब तक? एक सहज, स्वतंत्र, शांत और सौम्य जीवन की हकदार वह कब होगी?

स्त्री इस शरीर से परे भी कुछ है, यह प्रमाणित करने की जरूरत क्यों पड़ती है? वह पृथक है, मगर इंसान भी तो है। उसकी इस पृथकता में ही उसकी विशिष्टता है। वह एक साथी, सहचर, सखी, सहगामी हो सकती है लेकिन क्या जरूरी है कि वह समाज के तयशुदा मापदंडों पर भी खरी उतरे?

स्त्रियों के हालात सिर्फ हमारे देश में ही नहीं बल्कि समूचे विश्व में ही बेहतर नहीं हैं। झूठे आँकड़ों के डंडों से बेहतरी का ढोल पीटा जा रहा है। अमेरिका जैसे तथाकथित ‘सभ्य’ देश में हर 15 सेकंड में एक महिला अपने पति द्वारा पीटी जाती है। भारत जैसे संस्कारी राष्ट्र में हर 7 मिनट में महिलाओं के विरुद्ध एक अपराध होता है। हर 54वें मिनट में एक बलात्कार होता है।

Women’s Day Speech in English

International Women’s Day was first celebrated in 1911. The concept was proposed in 1910 at an International Conference of Working Women in Copenhagen. Then on 19 March 1911, more than one million women and men attended International Women’s Day events across Austria, Denmark, Germany and Switzerland. They were campaigning for women’s rights, including the right to vote, work and hold public office.

Women’s Day Speech in English

Since 1911, International Women’s Day has been held annually on 8 March. It is an important forum because:

  • It celebrates the economic, political and social achievements of women, and their vital role in societies across the world, and
  • It provides an occasion to reflect on and promote the work that still needs to be done towards true gender equality.

International Women’s Day is a crucial opportunity to keep women’s issues on national and international agendas. Despite greater protection for the rights of women – improved access to education; health care and employment – women still do not enjoy the same rights and opportunities as men in many areas.

Updated: February 1, 2018 — 3:56 pm

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